डाॅ. त्रिलोकीनाथ (ज्योतिषाचार्य और वास्तुविद)। Shardiya Navratri 2021 Maha Ashtami Maa Mahagauri Bhog And Aarti: शारदीय नवरात्रि में महाअष्टमी के दिन देवी मां के आठवें स्वरूप महागाैरी की पूजा होती है। इस बार महाष्टमी 13 अक्टूबर को पड़ रही है। महागाैरी मां का रंग गौर वर्ण का है इनके सभी आभूषण और वस्त्र सफेद है इसलिए इन्हें स्वेताम्बधरा कहा जाता है। ये भक्तजन को अपना शुभ आशीर्वाद देती रहती है। इसके अलावा उनकी संपूर्ण मनोकामनाओं को पूरा करती हैं। आठवें नवरात्रि में नारियल का भोग लगाने से भक्तों की संतान संबंधित सभी परेशानियां दूर होती हैं। मां महागाैरी के पूजन से भक्तों को व्यापार, दांपत्य जीवन, सुख-समृद्धि, लंबी आयु, धन आदि में वृद्धि मिलती है।

महागौरीः
श्वेत वृषे समारुढ़ा श्वेताम्बरधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा।।
नवरात्री के आठवें दिन इस शक्ति की पूजा की जाती है।यह मां चार भुजाओं वाली है। इनका वाहन वृषभ है इनका ऊपर वाला दाहिना हाथ अभय मुद्रा में रहता है। नीचे वाला हाथ त्रिशूल धारण किये हुए है। ऊपर वाले बायें हाथ में डमरु लिये हुए है और नीचे वाले हाथ में वरमुद्रा है भगवान शिव को पति के रुप में प्राप्त करने के लिए इस देवी ने कठोर तपस्या की इसी वजह से इनका शरीर काला पड़ गया। अपनी कठिन तपस्या के कारण भगवान शिव ने प्रसन्न होकर इनके शरीर को गंगा के पवित्र जल से धोकर क्रांतिमय बना दिया। इसी के कारण ये माता महागौरी के नाम जानी जाती है। मान्यता है कि महागौरी मां की पूजा करने से पुत्र ग्रह से जनित ग्रह दोष दूर होते हैं।

अष्टमी पर गाएं माता महागौरी की ये आरती

जय महागौरी जगत की माया ।

जया उमा भवानी जय महामाया ।।

हरिद्वार कनखल के पासा ।

महागौरी तेरा वहां निवासा ।।

चंद्रकली ओर ममता अंबे ।

जय शक्ति जय जय मां जगदंबे ।।

भीमा देवी विमला माता ।

कौशिकी देवी जग विख्याता ।।

हिमाचल के घर गौरी रूप तेरा ।

महाकाली दुर्गा है स्वरूप तेरा ।।

सती ‘सत’ हवन कुंड में था जलाया ।

उसी धुएं ने रूप काली बनाया ।।

बना धर्म सिंह जो सवारी में आया ।

तो शंकर ने त्रिशूल अपना दिखाया ।।

तभी मां ने महागौरी नाम पाया ।

शरण आनेवाले का संकट मिटाया ।।

शनिवार को तेरी पूजा जो करता ।

मां बिगड़ा हुआ काम उसका सुधरता ।।

भक्त बोलो तो सोच तुम क्या रहे हो ।

महागौरी मां तेरी हरदम ही जय हो ।।
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