डाॅ. त्रिलोकीनाथ (ज्योतिषाचार्य और वास्तुविद)। Shardiya Navratri 2021 Day 7 Maa Kalratri Bhog And Aarti: शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व पर रोजाना मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। ऐसे में 12 अक्टूबर मंगलवार के दिन सप्तमी तिथि के दिन मां कालरात्रि का पूजन किया जाएगा। शास्त्रों के मुताबिक सप्तमी तिथि का दिन मां कालरात्रि को समर्पित होता है। मान्यता है कि जो लोग मां कालरात्रि की पूजा करते हैं उनके जीवन से सभी तरह की परेशानियां दूर हो जाती हैं। मां कालरात्रि की पूजा से संपूर्ण मनोकामना पूर्ण होती है। इसके अलावा मां कालरात्रि अकाल मृत्‍यु का भय और कष्ट दूर करती हैं। इनकी शक्ति प्राप्त कर भक्त निर्भय और शक्ति संपन्न महसूस करता है। सातवें दिन माता को गुड़ का नैवेद्य चढ़ाया जाता है।

कालरात्रीः-
एकवेणी जपाकर्णपुरा नग्ना खरास्थिता।
लमबोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी।।
वामपादोल्लसल्लोहलताकणटकभूषणा ।
वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयंकरी।।

दुर्गा की यह सातवीं शक्ति कालरात्री के रुप में पूजी जाती है। इनके शरीर का रंग घने अंधकार की तरह काला है। सिर के बाल बिखरे हुए है इनके गले में विद्युत की तरह चमकने वाली माला है। अंधकारमय स्थितियों का विनाश करने वाली शक्ति के रुप में इन्हें कालरात्री कहा जाता है। देवी के तीन नेत्र है ये तीनों नेत्र ब्रह्मांड के समान गोल है। इनके सांसों से अग्नि के समान ज्वाला निकलती रहती है। इनके ऊपर उठे दाहिने हाथ की वर मुद्रा भक्तों को आशीर्वाद देती है इनके दाहिने तरफ का नीचे वाला हाथ अभय मुद्रा का संकेत देने वाला है बाईं तरफ के ऊपर वाले हाथ में लोहे का कांटा है और उसके नीचे वाले हाथ में खड़ग है यही इस देवी का स्वरुप है ये सदैव शुभ फल देने वाली माता के रुप में पूजी जाती है।

मां कालरात्रि की आरती

कालरात्रि जय- जय- महाकाली।

काल के मुंह से बचाने वाली॥

दुष्ट संघारक नाम तुम्हारा।

महाचंडी तेरा अवतार॥

पृथ्वी और आकाश पे सारा।

महाकाली है तेरा पसारा॥

खडग खप्पर रखने वाली।

दुष्टों का लहू चखने वाली॥

कलकत्ता स्थान तुम्हारा।

सब जगह देखूं तेरा नजारा॥

सभी देवता सब नर-नारी।

गावें स्तुति सभी तुम्हारी॥

रक्तदंता और अन्नपूर्णा।

कृपा करे तो कोई भी दुःख ना॥

ना कोई चिंता रहे बीमारी।

ना कोई गम ना संकट भारी॥

उस पर कभी कष्ट ना आवें।

महाकाली मां जिसे बचाबे॥

तू भी भक्त प्रेम से कह।

कालरात्रि मां तेरी जय॥