कानपुर। रंग पंचमी को होली उत्सव के 5 दिनों के बाद मनाया जाता है जो कि हिंदू के लिए मस्ती और रंगों का एक त्योहार है। यह भारतीय राज्यों- महाराष्ट्र, बिहार, उत्तर-प्रदेश, मध्य प्रदेश और उत्तरी भारत के अन्य हिस्सों में महत्वपूर्ण धार्मिक त्योहारों में से एक माना जाता है। हिंदू और ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार, यह पर्व कृष्ण पक्ष के पांचवें दिन मनाया जाएगा, जो कि फाल्गुन के हिंदू महीने के दौरान चंद्रमा का वानिंग चरण होता है। तो आइये, रंग पंचमी से जुड़ीं हर एक महत्वपूर्ण बातों पर नजर डालें।

रंग पंचमी समय और तिथि

मूल रूप से, ‘रंग’ शब्द का मतलब ‘कलर’ और ‘पंचमी’ का अर्थ है, ‘पांचवां दिन’ होता है, इसलिए इसे होली के 5वें दिन ही मनाया जाता है। 2020 में, रंग पंचमी 13 मार्च (शुक्रवार) को मनाई जा रही है। अब आपके मन में सवाल उठ रहा होगा कि रंग पंचमी क्या है! तो बता दें कि यह भी होली की तरह होता है और इसमें भी लोगों पर गुलाल और रंगीन पानी फेंका जाता है।

पंचमी तिथि शुरू- 13 मार्च, 2020 को सुबह 8:50 बजे

पंचमी तिथि समाप्त- 14 मार्च, 2020 को सुबह 6:16 बजे

रंग पंचमी का महत्त्व

रंग पंचमी का हिंदुओं के लिए अत्यधिक धार्मिक महत्व है और इसे एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान माना जाता है। जैसा कि हम सभी जानते हैं कि होलिका दहन होली से एक दिन पहले की जाती है। इस दिन आग में सभी बुराई को झोंककर सभी राजसिक और साथ ही वातावरण में मौजूद तामसिक कणों को शुद्ध किया जाता है। यह परिवेश में एक शुद्ध आभा बनाता है और वातावरण को जबरदस्त सकारात्मकता से भर देता है जो रंगों के रूप में विभिन्न देवताओं को सक्रिय करने में मदद करता है। इसी तरह, रंग पंचमी शुद्धि को सेलिब्रेट करने का उत्सव है। रंग पंचमी राजस और तमस पर विजय का प्रतीक है और ‘पंच तत्त्व’ का सम्मान करती है, जो ब्रह्मांड (पृथ्वी, प्रकाश, जल, आकाश और हवा) का निर्माण करता है। यह माना जाता है कि मानव शरीर भी पांच तत्वों से बना है। रंग पंचमी का त्योहार इन पांच मूल तत्वों को आमंत्रित करता है जो जीवन में संतुलन बहाल करने में मदद करते हैं।

रंग पंचमी का उत्सव

कई लोग रंग पंचमी और होली को लेकर कंफ्यूज हो जाते हैं। हालांकि, दोनों को समान तरीके से मनाया जाता है लेकिन काफी अलग कारण से मनाते हैं। आइए, इस उत्सव को मनाने के विभिन्न प्रकार पर चर्चा करें।

* इस त्योहार के दिन आमतौर पर इंदौर और महाराष्ट्र में, हाई-प्रेशर जेट के साथ एक पानी की टंकी के नेतृत्व में एक जुलूस, दो औपचारिक तोपें और एक ऊंट शहर की परिक्रमा करता है। इस तरह से शहर में कोई भी रंग से बच नहीं पाता है। खास तौर पर इंदौर में हजारों लोग राजवाड़ा के सामने तोप से खुद को रंगवाने के लिए इकट्ठा होते हैं। इस दिन इन जगहों पर लोग भांग और अल्कोहल का सेवन भी करते हैं।

* वहीं, महाराष्ट्र के स्थानीय लोग होली को शिमगा या शिमगो के नाम से भी जानते हैं। यह त्योहार विशेष रूप से फिशरफोक के बीच लोकप्रिय है। वे इसे बड़े पैमाने पर मनाते हैं और उत्सव के दौरान गायन और नृत्य का आयोजन होता है। इसके अलावा लोग अजीबोगरीब अंदाज में मुंह से आवाज निकालते हैं और अपने हाथों से पीठ के बल मुंह मारते हैं।

* कुछ स्थानों पर हिंदू भक्त इस दिन भगवान कृष्ण और राधा की पूजा भी करते हैं। वे कृष्ण और राधा के बीच दिव्य मिलन को श्रद्धांजलि देने के लिए पूजा अनुष्ठान करते हैं। यह त्योहार लोगों के बीच प्यार जगाने और बनाए रखने के लिए भी मनाया जाता है।

* बिहार, वृंदावन, दिल्ली और मथुरा के मंदिरों में रंग पंचमी का उल्लास देखने लायक होता है। यहां इस दिन होने वाले कार्यक्रमों में रंग खेलना, मिठाई खाना, रिश्तेदारों से मिलना और धार्मिक गीतों पर नृत्य करना आदि शामिल हैं।