कानपुर (इंटरनेट-डेस्क)। Pongal 2021: पोंगल का पर्व भी भारत में हर साल काफी धूमधाम से मनाया जाता है। मकर संक्रांति और लोहड़ी के त्योहारों को ही दक्षिण भारत में ‘पोंगल’ के रूप में मनाया जाता है। दृक पंचांग के मुताबिक पोंगल इस साल दिन बृहस्पतिवार, 14 जनवरी को मनाया जाएगा। ‘पोंगल’ शब्द तमिल साहित्य से लिया गया है जिसका अर्थ है ‘उबालना’। पोंगल दक्षिण भारत का विशेष रूप से तमिल का एक प्राचीन त्योहार है। यह मूल रूप से एक फसल उत्सव है जो तमिलनाडु में जनवरी-फरवरी (थाई) के महीने में चार दिन तक मनाया जाता है। प्रत्येक दिन को अलग-अलग त्योहारों द्वारा चिह्नित किया जाता है- पहले दिन को भोगी त्योहार कहा जाता है। दूसरे दिन को थाई पोंगल कहा जाता है। तीसरे दिन को मट्टू पोंगल कहा जाता है। चौथे दिन को कन्या पोंगल कहा जाता है।

पोंगल का इतिहास

त्योहार के इतिहास को संगम युग में वापस खोजा जा सकता है और इसे ‘द्रविड़ हार्वेस्ट त्योहार’ माना जा सकता है। हालांकि कुछ इतिहासकारों का दावा है कि यह त्योहार कम से कम 2,000 साल पुराना है। इसे थाई निर्दल के रूप में मनाया जाता था। किंवदंतियों के अनुसार, इस त्योहारी सीजन के दौरान अविवाहित लड़कियों ने देश की कृषि समृद्धि के लिए प्रार्थना की और इस उद्देश्य के लिए उन्होंने तमिल महीने मार्गाजी के दौरान तपस्या की। उन्होंने दूध और दूध से बने उत्पादों का सेवन बंद कर दिया पूरे महीने बालों को तेल नहीं लगाया था। कठोर शब्द बोलना गुनाह थ और अनुष्ठान के दाैरान सुबह प्रात:काल स्नान करना अनिवार्य था।

पोंगल का महत्व

यह मूल रूप से फसल कटाई का त्योहार है। इसे ‘धन्यवाद पर्व’ के रूप में भी मानाया जाता है क्योंकि यह त्याेहार सूर्य देव और भगवान इंद्र को बेहतर उपज देने वाली फसलाें में किसानों की मदद करने के लिए धन्यवाद दिया जाता है। त्योहार के दौरान लोग पुराने सामानों को अस्वीकार कर देते हैं और नए सामान का स्वागत करते हैं। मान्यता है कि भारत एक कृषि प्रधान देश है और अधिकांश त्योहारों का झुकाव प्रकृति की ओर होता है। एक अन्य त्योहार की तरह, पोंगल को उत्तरायण पुण्यकलम के रूप में जाना जाता है जो हिंदू पौराणिक कथाओं में विशेष महत्व रखता है और इसे बेहद शुभ माना जाता है।

Pongal 2021 Date: चार दिनों तक चलता है पाेंगल का पर्व, यहां जानें दिन, तारीख और समय