नई दिल्ली (एएनआई)। देश में भारतीय जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी की आज बुधवार को पुण्यतिथि मनाई जा रही है। डॉक्टर मुखर्जी ने देश की पहचान और अखंडता की रक्षा के लिए अपना सब कुछ बलिदान कर दिया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी को उनकी पुण्य तिथि पर याद करते हुए ट्वीट किया कि उनके नेक आदर्श, समृद्ध विचार और लोगों की सेवा करने की प्रतिबद्धता हमें प्रेरित करती रहेगी। राष्ट्रीय एकता की दिशा में उनके प्रयासों को कभी नहीं भुलाया जा सकेगा।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दी श्रद्धांजलि

इसके अलावा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि भारतीय जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने देश की पहचान और अखंडता की रक्षा के लिए बलिदान दिया है। इतना ही नहीं उन्होंने भारत को फिर से विभाजित होने से बचाया। सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के निर्माता डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी मातृभाषा को शिक्षा का माध्यम बनाने के पक्ष में थे। उनका मानना ​​था कि विकास में जनभागीदारी के बिना कोई भी देश आगे नहीं बढ़ सकता। उन्होंने सत्ता के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्र के पुनर्निर्माण के उद्देश्य से जनसंघ की स्थापना की।

जितेंद्र सिंह ने भी श्यामा प्रसाद मुखर्जी को किया नमन

केंद्रीय मंत्री डॉक्टर जितेंद्र सिंह ने भी श्यामा प्रसाद मुखर्जी को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने ट्वीट किया कि 68 साल पहले आज ही के दिन श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने श्रीनगर में 11 मई 1953 को कठुआ जम्मू और कश्मीर में प्रवेश बिंदु पर गिरफ्तार होने के बाद रहस्यमय परिस्थितियों में अंतिम सांस ली। उनकी पुण्य तिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि। श्यामा प्रसाद मुखर्जी भारतीय जनसंघ के संस्थापक थे और उन्होंने प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरू के मंत्रिमंडल में उद्योग और आपूर्ति मंत्री के रूप में भी कार्य किया।

श्यामा प्रसाद मुखर्जी 1953 में कश्मीर की यात्रा पर गए

भारतीय जनसंघ, ​​1951 में स्थापित भाजपा का वैचारिक मूल संगठन है। भाजपा की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार लिकायत अली खान के साथ दिल्ली समझौते के मुद्दे पर डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने 6 अप्रैल, 1950 को मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया। बाद में 21 अक्टूबर 1951 को मुखर्जी ने दिल्ली में भारतीय जनसंघ की स्थापना की और इसके पहले अध्यक्ष बने। मुखर्जी 1953 में कश्मीर की यात्रा पर गए और 11 मई को उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। 23 जून, 1953 को उनकी मृत्यु हो गई।