कानपुर (इंटरनेट डेस्क)। इस वर्ष 04 सिंतबर 2020,शुक्रवार को कोई भी तिथि श्राद्ध नहीं होगा। परन्तु जो लोग किसी कारण वश 03 सितंबर को द्वितीया का श्राद्ध न कर सकें वे 04 सिंतबर को भी अपराह्न 01:43 बजे से 2:24 बजे तक श्राद्ध कार्य कर सकते हैं।

1.प्रोष्ठपदी(पूर्णिमा)श्राद्ध
पूर्णिमा का श्राद्ध दिनाँक 01 सितंबर 2020, मंगलवार को ही मान्य होगा,क्योंकि यह पार्वण श्राद्ध है,पूर्णिमा का श्राद्ध पूर्णिमा को ही होना चाहिए। शास्त्र नियम के अनुसार अपराह्न व्यापिनी भाद्र शुक्ल पक्ष पूर्णिमा के दिन इसे करने का विधान है। इस वर्ष यह पूर्णिमा 01 सितंबर 2020,मंगलवार को प्रातः 9:39 बजे के बाद अपराह्न व्यापिनी है।

2.प्रतिपदा का श्राद्ध
इस वर्ष 02 सिंतबर 2020,बुधवार को प्रतिपदा का श्राद्ध मान्य होगा क्योंकि इस दिन प्रतिपदा प्रातः 10:52बजे के बाद अपराह्न व्यापिनी है तथा 03 सितंबर 2020,गुरुवार को प्रतिपदा अपराह्न से पूर्व 12:27 बजे ही समाप्त हो जाती है।इस दिन अपराह्न काल अपराह्न में 1:37 बजे से सांय 4:08 बजे तक रहेगा।

3.द्वितीया का महालय श्राद्ध
आश्विन कृष्ण पक्ष(पितृ-पक्ष) में आत्मीय मृत व्यक्ति की जो तिथि आये,उस तिथि में पार्वण श्राद्ध करने का विधान है।पार्वण श्राद्ध में पिता,पितामह,प्रपितामह, सपत्नीक अर्थात माता,दादा और परदादी सहित छ: जनों का श्राद्ध होता है इन्हें अपराह्न-व्यापिनी मृत्यु तिथि के दिन ही करना चाहिए। शास्त्र के अनुसार यदि मृत्यु तिथि अपराह्न काल को दो दिन असमान रूप से व्याप्त हो अर्थात एक दिन अधिक दूसरे दिन कम समय के लिए व्याप्त करे तो वहां अधिक अपराह्न काल-व्याप्ति वाले दिन श्राद्ध किया जाता है। द्वितीया का श्राद्ध इस वर्ष 03 सितंबर 2020,गुरुवार को ही मान्य होगा।अपराह्न व्यापिनी आश्विन कृष्ण द्वितीया को यह श्राद्ध करने का शास्त्र नियम है।इस वर्ष द्वितीया तिथि 03 सिंतबर 2020 को अपराह्न 12:27 बजे से प्रारंभ होकर 04 सिंतबर 2020 को अपराह्न 2:24 बजे तक रहेगी।दिनाँक 03 सिंतबर 2020 को अपराह्न काल लगभग अपराह्न 1:35 से सांय 4:08 बजे तक रहेगा।अतः इस दिन यह तिथि अपराह्न के पूर्ण काल को व्याप्त कर रही है।

:-विशेष:- इस बार *04 सितंबर 2020,शुक्रवार को कोई भी तिथि अपराह्न व्यापिनी नहीं है।अतः इस दिन कोई भी तिथि श्राद्ध घटित नहीं होगा।
4.तृतीया का श्राद्ध
तृतीया का श्राद्ध दिनाँक 05 सिंतबर 2020,शनिवार को शास्त्र सम्मत मान्य होगा क्योंकि अपराह्न व्यापिनी आश्विन कृष्ण तृतीया के दिन यह श्राध्द किया जाता है।तृतीया तिथि 04 सितंबर 2020,शुक्रवार को केवल कुछ ही समय के लिए अपराह्न में विधमान है(अपराह्न 2:24 बजे के बाद),परंतु दिनाँक 05 सिंतबर को तृतीया तिथि अपराह्न काल के पूर्ण भाग को व्याप्त कर रही है।

5.चतुर्थी का महालय श्राद्ध:--06 सितंबर 2020,रविवार
6.पंचमी का श्राद्ध:- 07 सितंबर 2020,सोमवार
7.षष्ठी का श्राद्ध:- 08 सितम्बर 2020,मंगलवार
8.सप्तमी का श्राद्ध:- 09 सितंबर 2020,बुधवार
9.अष्टमी का श्राद्ध:-10 सितंबर 2020,गुरुवार
10.नवमी के श्राद्ध(मातृ-नवमी):– 11 सितंबर 2020,शुक्रवार
11.दशमी का श्राद्ध:-12 सितंबर 2020,शनिवार
12.एकादशी का श्राद्ध:- 13 सितंबर 2020,रविवार
13.द्वादशी का श्राद्ध:-14 सितंबर 2020,सोमवार
14.त्रियोदशी का श्राद्ध(मघा-श्राद्ध):-15 सितंबर 2020,मंगलवार
आश्विन कृष्ण त्रयोदशी में पितृ श्राद्ध का विशेष महात्म्य है।यदि इस दिन अपराह्न काल के समय मघा नक्षत्र व्याप्त हो तो पितृ तर्पण,श्राद्ध,शांति के लिए विशेष महत्वपूर्ण हो जाता है।इस वर्ष 15 सितंबर 2020 को मघा-नक्षत्र अपराह्न व्यापिनी है।अतः इस दिन श्राद्ध में पुत्रवान को अपिण्ड श्राद्ध करना चाहिए।इस दिन अपराह्न काल लगभग अपराह्न 1:37बजे से 4:03बजे तक रहेगा।*

15/16. चतुर्दशी/अमावस्या का श्राद्ध:-17 सितंबर 2020,बुधवार।

ज्योतिषाचार्य पं राजीव शर्मा
बालाजी ज्योतिष संस्थान,बरेली।