डाॅ. त्रिलोकीनाथ (ज्योतिषाचार्य और वास्तुविद)। Maha Shivratri 2021 देवों के देव महादेव की पूजा यदि पूरी तनमयता से की जाये तो शिव जी ही ऐसे देवता है जो शीघ्र प्रसन्न होते है। प्रसन्न होते ही भक्तों को शिव जी की विशेष कृपा एवं आशीर्वाद प्राप्त होता है। शिव जी आडम्बर प्रिय देवती नहीं है। पूजा में भक्त निष्ठा से यदि बेलपत्र, धतूरा या भांग ही चढ़ा दे तो वे प्रसन्न हो जाते है। इस बार शिवरात्री 11 मार्च को पड़ रही है। फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष के त्रयोदशी तिथि में चन्द्रमा मकर राशि में रहेगें। सूर्य कुंभ राशि में रहेगें। इस तिथि को विशेष योग बनेगा।

पूजा का समय
शिव योग में महाशिवरात्रि की पूजा का विशेष महत्व है। रात्री 12 बजकर 06 मिनट से 12 बजकर 55 मिनट तक अभिजित मूहूर्त पड़ रहा है। इस शुभ मूहूर्त में पूजा का विशेष फल प्राप्ति का योग है। भक्तगण यदि इस समय शिव जी की पूजा करेगें तो उन्हें शिव जी का आशीर्वाद प्राप्त होगा। वेदों में शिव जी की पूजा को 4 बार करने से विशेष शुभ माना गया है। पूजा का पहला प्रहर 11 मार्च शाम 06 बजकर 27 मिनट से 09 बजकर 29 मिनट तक रहेगा। दूसरा प्रहर रात्री 09 बजकर 29 से 12 बजकर 31 तक रहेगा। तीसरा प्रहर 12 बजकर 31 से 03 बजकर 32 तक रहेगा। चौथा प्रहर 12 मार्च के ब्रह्म मूहूर्त में प्रारम्भ होगा अर्थात 03 बजकर 32 मिनट से 06 बजकर 34 मिनट तक रहेगा।

पूजा विधि
तीन पत्तों वाले बेलपत्र का 108 बेलपत्र चढ़ाये एवं भांग को दूध में मिलाकर शिवलिंग पर चढ़ानें से शुभ फल प्राप्त होगा।मान्यता है कि भांग धतूरा गन्ने का रस गंगाजल गाय का दूध बेरी, बेर, बेल शिव लिंग पर चढ़ाने से शिव जी प्रसन्न होते है। शिव जी के सामने यदि हो सके तो घी का दीपक जलायें जो कि पूरी रात्री जलें। शिव जी की पूजा के पहले शिव जी को पंचामृत से स्नान करायें। केसर डालकर 8 लोटा जल अर्पित करें। चन्दन का तिलक लगायें। शिव रात्री के दिन ऊँ भगवते रूद्राय नमः या ऊँ नमः शिवाय रूद्राय् शम्भवाय् भवानीपतये नमो नमः मंत्र का जाप करें। केसर से बनी खीर का प्रसाद शिव जी को चढ़ाये। शिव पुराण पढ़े या शिव चालीसा पढ़े। पूजा के दौरान शिव आरती भी करें। सम्भव हो सके तो रात्री जागरण करें। इसका विशेष फल मिलता है। बिना कुछ खाये पीये शिव जी का व्रत किया जाये तो उसका विशेष फल प्राप्त होता है।

महाशिवरात्रि व्रत पारण मूहूर्त
06 बजकर 36 से दोपहर 03 बजकर 04 मिनट तक पारण(व्रत तोड़ना) किया जा सकता है। इस समय व्रती कभी भी शिव जी की आरती करके शिव जी पर चढ़ाया गया भोग ग्रहण करके व्रत समाप्त कर सकते है। इससे व्रत का पूरा महात्म भक्तगण को मिल जाता है। शिव जी कृपा भी बनी रहती है।शिवरात्री व्रत में इसका अत्यधिक महात्म है इसलिए इसे महाशिवरात्रि कहा जाता है इस व्रत को करने से विशेष फलों की प्राप्ति होती है। धन धान्य की कमी पूरी होती है। स्वास्थ्य से संबंधित विशेष लाभ मिलता है। व्यक्ति की काया निरोग होती है।वह व्याधिरहित लम्बी आयु को प्राप्त होता है।

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