कृष्ण के जन्म लेते ही सभी मोहनिद्रा से ग्रसित हो गए थे इसीलिए इसकी मोहरात्रि की मान्यता है।श्री कृष्ण के जन्म के समय में धर्म-अधर्म का असंयमित योग था। धर्म भी अधर्म की राह चल रहा था-इसी कारण से इसे द्वापर-युग की संज्ञा दी गई।

ये है कृष्ण के जन्म कराने का सही समय

अर्धरात्रि में जन्में कृष्ण अधर्म पर धर्म की विजय के प्रतीक हैं।श्री कृष्ण ने गीता के उपदेश से नीति-न्याय और कर्मप्रेरित धर्म को प्रतिष्ठित किया।कृष्ण अन्धकार से प्रकाश की ओर जाने वाले ज्योति-पुंज हैं। इस वर्ष श्री कृष्ण जन्माष्टमी २३ अगस्त,शुक्रवार को कृतिका तदुपरि रोहिणी नक्षत्र में पड़ रही है।जन्म कराने का मुहूर्त—रात्रि में 10: 44 बजे से 12:40 के मध्य है।भगवान को जन्म कराकर पंचामृत स्नान कराने से समस्त पापों का क्षय होता है।तदुपरान्त ऋतुफल, मिष्ठान्न समर्पित कर रात्रि जागरण करने वाला सभी कष्टों से मुक्त हो जाता है।

इस मंत्र का जाप करने से होगी मनो कामना पूरी

अर्धरात्रि व्यापिनी तिथि एवं रोहिणी नक्षत्र के योग में इस वर्ष श्री कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत-पर्व एक ही दिन होगा।इस वर्ष का यह पर्व अत्यन्त पुण्य-फलदायक है। श्री कृष्ण जन्मोत्सव का पूजन-श्रिंगार करके यथाशक्ति यथासामर्थ्य धूप,दीप,नैवेद्य,फलादि भगवान को समर्पित कर जो भी रात्रि जागरण करते हुए निम्न मन्त्र का जाप करते हैं, उन्हें काल का भय नहीं होता तथा सुख समृद्धि बनी रहती है।

मंत्र – श्री कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने प्रणत: क्लेशनाशाय गोविन्दाय नमो नमः।

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का विधिवत पूजन अरचन करने से नि:संतान को संतान की प्राप्ति अवश्य होती है। इसके लिए गोपाल सहस्र नाम करना श्रेयस्कर होता है।

-पंडित चक्रपाणि भट्ट