कानपुर (इंटरनेट डेस्क)। हरतालिका तीज महिलाओं द्वारा मनाए जाने वाले तीन मुख्य तीज त्योहारों में से एक है। इसे मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड और राजस्थान में मनाया जाता है। वहीं अन्य दो तीज हरियाली तीज (जो श्रावण के पवित्र महीने में तृतीया तिथि, शुक्ल पक्ष पर पड़ती है) और कजरी तीज (भाद्रपद में तृतीया तिथि, कृष्ण पक्ष पर मनाई जाती है) हैं। वहीं हरतालिका तीज भाद्रपद में तृतीया तिथि, शुक्ल पक्ष को रखा जाता है। दिलचस्प बात यह है कि इन महत्वपूर्ण दिनों में एक पखवाड़े का अंतर है। इस बार यह हरतालिका तीज 9 सितंबर को पड़ रही है।
हरतालिका तीज 2021 तिथि
हरतालिका तीज इस साल 9 सितंबर को मनाई जाएगी। तृतीया तिथि 9 सितंबर को दोपहर 2:33 बजे शुरू होगी और 10 सितंबर को दोपहर 12:18 बजे समाप्त होगी।
हरतालिका तीज पूजा का शुभ मुहूर्त
हरतालिका तीज पूजा सुबह या शाम के समय की जा सकती है। हरतालिका तीज प्रथम काल पूजा मुहूर्त – सुबह 6:03 से 8:33 बजे तक, हरतालिका तीज प्रदोष काल- शाम 6:33 से रात 8:51 बजे तक है।
हरतालिका तीज का महत्व और कथा
माना जाता है कि हरतालिका शब्द दो संस्कृत शब्दों हरात (अपहरण) और आलिका (मित्र) से बना है। संयुक्त होने पर, इसे हरतालिका के रूप में लिखा जाता है, जिसका अर्थ है एक दोस्त का अपहरण। हालांकि अपहरण शब्द को शाब्दिक अर्थ में नहीं लिया जाना चाहिए। यहां इसका गहरा अर्थ और उद्देश्य है। हरतालिका तीज से जुड़ी किंवदंती के अनुसार, देवी पार्वती शिव से विवाह करना चाहती थीं। भगवान शिव को पाने के लिए वे कठोर तपस्या कर रही थीं लेकिन उनके पिता हिमालय राज ने उनकी शादी भगवान विष्णु से तय कर दी थी। ऐसा होने से बचने के लिए माता पार्वती की सहेलियों ने उनका अपहरण कर लिया और उन्हें गुफा में ले गईं ताकि उन्हें भगवान विष्णु से शादी करने से बचाया जा सके। माता पार्वती गुफा में भी कठोर तपस्या करती रहीं। इससे भोलेनाथ बहुत प्रसन्न हो गए और उन्होंने माता पार्वती को पत्नी के रूप में स्वीकार कर लिया था।

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