इस बार शुक्रवार को उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र एवं ब्रह्मयोग में धनतेरस होना शुभ माना जा रहा है।इस दिन चातुर्मास की समाप्ति होगी।इस दिन गो वत्स द्वादशी भी है।इस दिन सर्वार्थसिद्धि एवं राजयोग भी सूर्योदय से है।इस दिन द्वादशी तिथि की समाप्ति सांय 7:08 बजे होगी।तदोपरान्त त्रयोदशी तिथि आरम्भ होगी। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान धन्वन्तरी का जन्म हुआ था।भगवान धन्वन्तरी आयुर्वेद विद्या के जनक माने जाते हैं।

इसी दिन प्रकट हुए थे भगवान धन्वन्तरी

समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वन्तरी इसी दिन समुद्र से हाथ में अमृत कलश लिए प्रकट हुए थे इसलिए इस दिन को धन्वन्तरी जयंती भी कहा जाता है, ऐसा भी माना जाता है कि समुद्र मंथन के समय शरद पूर्णिमा के दिन चंद्र देव,कार्तिक द्वादशी के दिन कामधेनु गाय, त्रयोदशी के दिन भगवान धन्वन्तरी, चतुर्दशी के दिन मां काली एवं अमावस्या के दिन महालक्ष्मी का प्रादुर्भाव हुआ था।

खरीदारी व पूजा के शुभ मुहूर्त

प्रातः काल 7:40 से 10:39 तक लाभ,अमृत के चौघड़िया मैं।अपराह्न 12:03 से अपराह्न 1:27 बजे तक शुभ के चौघड़िया में।रात्रि 8:53से रात्रि  10:58 तक फिर लाभ के चौघड़िया मुहूर्त में।  तक प्राचीन काल से ही इस दिन कुछ न कुछ खरीदने की परंपरा चली आ रही है।किसान लोग इस दिन सबूत धनिया खरीदकर लाते हैं और उसे गमलों में बोते हैं।ऐसा मानते हैं कि जिस घर मे जितनी अधिक पैदावार होगी,वहां लक्ष्मी जी की उतनी ही कृपा रहेगी। इस दिन कुबेर की पूजा भी होती है।चांदी उन्हें पसंद है तो चांदी खरीदना भी शुभ रहेगा।पीतल भगवान धन्वन्तरी से संबंधित धातु है,इसका खरीदना परिवार के अच्छे स्वास्थ्य का सूचक है।कुछ व्यापारी लोग धनतेरस पर नए बही खाते खरीदते हैं और दीवाली पर इसकी पूजा करते हैं। अलग-अलग राशि के अनुसार भी खरीदारी की जाती है।

-ज्योतिषाचार्य पंडित राजीव शर्मा