डाॅ. त्रिलोकीनाथ (ज्योतिषाचार्य और वास्तुविद)। Chaitra Navratri 2021 Day 3 Maa Chandraghanta Aarti-Bhog: इस साल चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ 13 अप्रैल को हो गया है। नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री व दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी और तीसरे दिन देवी चंद्रघंटा की आराधना की जाती है। चंद्रघंटा मां दुर्गा की तीसरी शक्ति मानी गई है। नवरात्रि के तीसरे दिन इस देवी की अराधना की जाती है। तृतीय नवरात्रि में मां चंद्रघंटा को दूध से बनी मिठाई का भोग लगाकर उसे ब्राह्मणों को दान देना चाहिए। इससे भक्तों को दुखों से मुक्ति के साथ-साथ परम आनंद की प्राप्ति होती है।

चन्द्रघंटाः-
पिण्डजाप्रव रारुढ़ा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुतं मह्यं चंद्रघण्टेति विश्रुता।।
देवी के इस तीसरे स्वरूप के बारे में शास्त्रों में बताया गया है कि इनके सिर पर घंटे के आकार का आधा चन्द्रमा है । इसलिए इन्हें चंद्रघंटा के नाम से जाना जाता है। सोने के समान इनका शरीर चमकता है। देवी का यह रुप परमशांतिदायक है और कल्याणकारी है। इस देवी के दस हाथ बताये गये है। यह देवी खडग एवं अन्य अस्त्र- शस्त्रों से विभूषित है। सिंह इनकी सवारी है। इस देवी की मुद्रा युद्ध के लिए सक्रिय अवस्था में रहने वाले भाव जैसी होती है। यदि इस देवी की कृपा मिल जाये तो साधक अलौकिक वस्तुओं का दर्शन करने में सफल हो जाता है। इनके प्रभाव से दिव्य सुगंधित वातावरण का अनुभव होता है। ये लक्ष्य प्राप्त की भी देवी मानी गई है। इनकी पूजा से भक्तगण अपने लक्ष्य को जो इन्होंने मनोकामना बनाई है उसकी प्राप्ति होती है।

माता चंद्रघंटा की आरती

पूर्ण कीजो मेरे काम

चंद्र समान तू शीतल दाती

चंद्र तेज किरणों में समाती

क्रोध को शांत बनाने वाली

मीठे बोल सिखाने वाली

मन की मालक मन भाती हो

चंद्र घंटा तुम वरदाती हो

सुंदर भाव को लाने वाली

हर संकट मे बचाने वाली

हर बुधवार जो तुझे ध्याये

श्रद्धा सहित जो विनय सुनाय

हर संकट मे बचाने वाली

हर बुधवार जो तुझे ध्याये

श्रद्धा सहित जो विनय सुनाय

मूर्ति चंद्र आकार बनाएं

सन्मुख घी की ज्योत जलाएं

शीश झुका कहे मन की बाता

पूर्ण आस करो जगदाता

कांची पुर स्थान तुम्हारा

करनाटिका में मान तुम्हारा

नाम तेरा रटू महारानी

‘भक्त’ की रक्षा करो भवानी