कानपुर (इंटरनेट डेस्क)। Ashadh Gupt Navratri 2021: हिंदू धर्म में नवरात्रि व्रत देश के प्रमुख पर्वों में से एक माना जाता है। नवरात्रि के नौ दिन मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की विधिविधान से पूजा की जाती है। शास्त्रों में कुल चार प्रकार के नवरात्रि शरद नवरात्रि, चैत्र नवरात्रि, माघ नवरात्रि और आषाढ़ नवरात्रि का वर्णन हैं। इसमें शरद और चैत्र में पड़ने वाले नवरात्रि काफी चर्चित हैं और माघ और आषाढ़ नवरात्रि गुप्त हैं। इन्हें गुप्त नवरात्रि के नाम से ही पुकारा जाता है। दृक पंचांग के मुताबिक इस साल आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 11 जुलाई से शुरू हो रहे हैं और इनका समापन 19 जुलाई को होगा।

तांत्रिकों के लिए गुप्त नवरात्रि का बहुत महत्व होता

गुप्त नवरात्रि में मां दुर्गा की दस महाविघाओं की साधना की जाती है। मान्यता है कि तांत्रिकों के लिए गुप्त नवरात्रि का बहुत महत्व होता है। तंत्र साधना वाले साधक गुप्त नवरात्रि में इन दस महाविद्याओं की ही साधना करते हैं। इनमें मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, माता छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, मां ध्रूमावती, माता बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी शामिल हैं। शारदीय व चैत्र नवरात्रि के दौरान मनाए जाने वाले अधिकांश रीति-रिवाजों और अनुष्ठानों का पालन आषाढ़ गुप्त नवरात्रि के दौरान भी किया जाता है। कलश स्थापना चारों नवरात्रों के महत्वपूर्ण अनुष्ठानों में से एक मना जाता है।

देवी के विभिन्न स्वरूपों की पूजा सुबह शाम की जाती

गुप्त नवरात्रि में भी पहले दिन कलश स्थापना के बाद हर दिन विधिविधान से देवी के विभिन्न स्वरूपों की पूजा सुबह शाम की जाती है। इसके बाद फिर अष्टमी या नवमी के दिन हवन आदि किया जाता है और कन्याओं के पूजन के साथ व्रत का समापन किया जाता है। नाम के अनुसार इस गुप्त नवरात्रि में की जाने वाली पूजा साधना शांत तरीके से ही होती है। गुप्त नवरात्रि के नौ दिनों तक मां दुर्गा की कठिन भक्ति और तपस्या करने वालों को शक्ति और सिद्धियां प्राप्त होती हैं। साधक के मंत्र भी सिद्ध हो जाते हैं। इन गुप्त नवरात्रों के दौरान तामसी भोजन, लहसुन, प्याज, मांस, मदिरा का उपयोग नहीं करना चाहिए।