डाॅ. त्रिलोकीनाथ (ज्योतिषाचार्य और वास्तुविद)। दिन का शुभ मुहूर्त, दिशाशूल की स्थिति, राहुकाल एवम् गुलिक काल की वास्तविक स्थिति के बारे में जानकारी आगे दी गई है।

सूर्योदयः- प्रातः 06:33:48
सूर्यास्तः- सायं 05:49:24
विशेषः- रविवार को भगवान सूर्य को प्रातः ताम्बे के बर्तन में लाल चन्दन, गुड़ और लाल पुष्प डाल कर अर्घ्य देना चाहिए।

विक्रम संवतः– 2077
शक संवतः- 1942
आयनः- दक्षिणायन
ऋतुः- बसंत ऋतु
मासः- माघ माह
पक्षः- शुक्ल पक्ष

तिथिः- नवमी तिथि 13:45:17 तक समाप्ति तदोपरान्त दशमी तिथि
तिथि स्वामीः- नवमी तिथि की स्वामिनी माँ दुर्गा जी हैं। तथा दशमी तिथि के स्वामी यमराज जी है।
नक्षत्रः- मृग नक्षत्र 09:00:41 तक समाप्ति तदोपरान्त आर्द्रा नक्षत्र
नक्षत्र स्वामीः- मृग नक्षत्र के स्वामी मंगल देव हैं तथा आर्द्रा नक्षत्र के स्वामी राहु देव है।
योगः- विषकुंभ 29:33:44 तक तथा प्रीति
गुलिक कालः- शुभ गुलिक काल 03:25:00 से 04:50:00 तक

दिशाशूलः- रविवार को पश्चिम दिशा की यात्रा नहीं करना चाहिए यदि यात्रा करना आवश्यक हो तो घर से पान या घी खाकर निकलें।
राहुकालः- आज का राहु काल 04:50:00 से 06:15:00 तक

तिथि का महत्वः- इस तिथि में लौकी नही खाना चाहिए यह तिथि रिक्ता तिथि है और इस तिथि में मांगलिक कार्य करना वर्जित है ।

“हे तिथि स्वामी, योग स्वामी, नक्षत्र स्वामी, दिन स्वामी आप पंचांग का पाठन करने वालों पर अपनी कृपा दृष्टि बनाये रखना।”