27 मार्च: शीतला सप्तमी व्रत

28 मार्च: श्री शीतलाष्टमी व्रत

31 मार्च: पापमोचनी एकादशी व्रत

2 अप्रैल: भौम प्रदोष व्रत

निर्झरिणी

जब तक कष्ट सहने की तैयारी नहीं होती, तब तक लाभ दिखाई नहीं देता। लाभ की इमारत कष्ट की धूप में ही बनती है। —आचार्य विनोबा भावे

यथार्थ गीता

हृदय में प्रवाहित होता है गुरुत्व

न बन्धुर्न मित्रं गुरुर्नैव शिष्य:। चिदानन्दरूप: शिवोअहम् शिवोअहम्।।

जब चित्त उस परम आनंद में विलीन हो जाता है, तब न गुरु ज्ञानदाता और न शिष्य ग्रहणकर्ता रह जाता है। यही परम की स्थिति है। गुरु का गुरुत्व प्राप्त कर लेने पर गुरुत्व एक जैसा हो जाता है। श्रीकृष्ण कहते हैं, ‘अर्जुन, तू मुझमें निवास करेगा।’ जैसे श्रीकृष्ण वैसे ही अर्जुन और ठीक वैसा ही गुरु की कृपा पाने वाला महापुरुष भी हो जाता है। ऐसी अवस्था में गुरु का भी विलय हो जाता है, गुरुत्व हृदय में प्रवाहित हो जाता है। अर्जुन गुरु पद की ढाल बनाकर इस संघर्ष में प्रवृत्त होने से कतराना चाहता है।

शीतलाष्टमी 2019: इस बार बन रहा है दुर्लभ वरीयान योग, जानें मुहूर्त, व्रत कथा और पूजा विधि