नई दिल्ली (पीटीआई)। सालों से कुछ कार्यक्रम लांच किए गए ताकि लाभार्थियों को बिना लीकेज सीधे मदद पहुंचे। कोशिश यह रही कि सरकार तथा लाभार्थियों के बीच कम से कम लोग शामिल हों। अच्छे प्रशासन का विजन लेकर सरकार ने इलेक्ट्राॅनिक वाउचर को आगे बढ़ाया। स्वास्थ्य सेवाओं के लिए ई-रूपी की सुविधा शुरू कराई जा रही है। भविष्य में इसे दूसरे सेगमेंट में भी लागू किया जाएगा।

डिजिटल लेनदेन में बड़ी भूमिका निभाएगा ई-रूपी

ई-रूपी लांच करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, ‘आज देश को डिजिटल गवर्नेंस का नया आयाम दिया जा रहा है। डिजिटल लेनदेन में ई-रूपी वाउचर बहुत बड़ी भूमिका निभाने जा रहा है। इससे डाइरेक्ट बेनिफिट ट्राजेक्शन और ज्यादा प्रभावी होगा। इसके जरिए लीकेज के बिना सीधे लाभार्थियों के खाते में मदद पहुंचेगी।’

दी गई धनराशि का उपयोग उसी काम के लिए

पीएम ने कहा कि इससे न सिर्फ सरकार बल्कि कोई सामान्य संस्था भी किसी के इलाज, शिक्षा या किसी अन्य काम में मदद करना चाहे तो वे कैश की जगह ई-रूपी का प्रयोग कर सकते हैं। इससे इस बात का पूरा भरोसा रहेगा कि दी गई राशि का उपयोग उसी काम के लिए वह व्यक्ति कर सकेगा।

ई-रूपी से कैशलेस तथा कांटेक्टलेस लेनदेन

एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि ई-रूपी से डिजिटली कैशलेस तथा कांटेक्टलेस लेनदेन किया जा सकेगा। यह एक क्यूआर कोड या एसएमएस आधारित ई-वाउचर हो जिसे लाभार्थी के मोबाइल पर भेजा जा सकेगा। यूजर बिना कार्ड के इस वाउचर का भुगतान के लिए एक बार इस्तेमाल कर सकेगा। इसके लिए डिजिटल पेमेंट एप या इंटरनेट बैंकिंग एक्सेस की जरूरत नहीं होगी।

एनपीसीआई ने किया ई-रूपी काे विकसित

बयान में कहा गया कि ई-रूपी काे नेशनल पेमेंट काॅरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) ने अपने यूपीआई प्लेटफार्म पर डेवलप किया है। इसे विकसित करने में एनपीसीआई का डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज, मिनिस्ट्री ऑफ हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर तथा नेशनल हेल्थ अथाॅरिटी ने सहयोग किया है।