राजयोगी ब्रह्माकुमार निकुंजजी (धर्मगुरु)। बड़ी विचित्र सी बात है कि जिंदगी भर अमूल्य समय को गवां करके जब मनुष्य मौत की सेज पर सोया होता है, तब उसे समय की कीमत समझ में आती है और वह भिखारी बनकर कुछ समय की भीख परमात्मा से मांगता है कि मुझे थोड़ा और समय दे दो। भला ऐसा क्यों होता है? जो हम समय का महत्व जानते हुए भी उसे व्यर्थ ही जाया करते हैं? इसका मूल कारण है समय प्रबंधन कर न पाने की हमारी असमर्थता।

जीवन प्रबंधन के लिए समय का प्रबंधन करना अति आवश्यक

जी हां, समय बर्बाद करने की हमारी आदत की वजह से हम यह भूल जाते हैं कि जीवन प्रबंधन के लिए समय का प्रबंधन करना अति आवश्यक है, अन्यथा हमारा जीवन अस्त-व्यस्तता से भरपूर हो जाता है। याद रखें, प्रभावी समय प्रबंधन का आधार समय के महत्व के बारे में उचित समझ पर निर्भर है, अत: जब तक हम यह नहीं समझेंगे की समय एक ऐसा अनूठा संसाधन है जिसकी अनूठी विशेषताएं हैं, तब तक न हम उसकी बचत कर पाएंगे और न उसे संग्रहीत कर पाएंगे।

नासमझी के कारण विश्वभर में समय की कितनी बर्बादी हो रही

जरा सोचिए मनुष्यों की एक नासमझी के कारण आज विश्वभर में समय की कितनी बर्बादी हो रही है। मजेदार बात तो यह है कि समय एक ऐसी वस्तु है जो हम सभी के पास समान मात्रा में है, परंतु इस प्राप्त समय का कौन कितना और कैसा सदुपयोग करता है उसका आधार तो हर व्यक्ति की अपनी सूझ-बूझ पर है। मसलन एक ही क्लास में एक ही शिक्षक द्वारा पढ़ाए जाने वाले 40 बच्चों में से दिन में 8 घंटा पढ़कर एक बच्चा अव्वल नंबर से पारित होता है। उसी के साथ बैठने वाला उसका मित्र सारा दिन खेलकूद में और टीवी देखने में अपना समय जाया करके अनुत्तीर्ण हो जाता है। कहने का तात्पर्य यह है कि जो समय का उपयोग जैसा करेगा वैसा पाएगा।

समय प्रबंधन का महत्व जानते हुए भी इसकी जानकारी नहीं

अधिकांश लोगों की यह आम दुविधा होती है कि समय प्रबंधन का महत्व जानते हुए भी उसे करते कैसे हैं, इसकी जानकारी न होने के कारण वह समय बर्बाद करने के उसी चक्रव्यूह में फंसे रहते हैं। इसलिए सर्वप्रथम हमें यह भोजना होगा कि हमारा समय बर्बाद करने वाले प्रमुख कारक कौन से हैं। मसलन, नियोजन करने की कमी, किसी को कार्य न सौंप पाने की कमी, विविध प्रकार के व्यवधान, गलत मूल्यों की धारणा की वजह से ईर्ष्या, घृणा, क्रोध और अहंकार जैसे विकृतियों का निर्माण। जैसे आम कारकों की वजह से हमारा समय बर्बाद होता रहता है।

पूर्वाग्रहों, लगाव-झुकाव, ममत्व इत्यादि से बर्बाद होता है समय

हममें से अधिकतर लोगों को यह पता ही नहीं चलता है कि मित्र-संबंधियों के पीछे हमारा सबसे अधिक समय जाया होता है। इसके अलावा पूर्वाग्रहों, लगाव-झुकाव, अति ममत्व, तन और मन को बीमार करने वाली चिंता और तनाव इन सभी की वजह से भी हमारा काफी समय बर्बाद होता है। इसलिए यदि हम अपने समय का सदुपयोग करना चाहते हैं तो उसके लिए हमें संत कबीर के दोहे का अनुसरण करना चाहिए जो कहता है कि काल करे सो आज कर, आज करे सो अब, पल में प्रलय होएगी, बहुरि करेगा कब।